जाने मेहरानगढ़ किले का अनोखा इतिहास, क्या है इस किले का रहस्य

मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है, जो भारत के मजबूत और गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है

मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राज्य के बेहतरीन और फेमस म्यूजियम में से एक है

जोधपुर का मेहरानगढ़ किला सबसे खास है. बिल्कुल ऊंची और सीधी खड़ी चट्टान पर यह किला देश के भव्य विशाल किलों में से एक है.

मेहरानगढ़ किले से पूरे जोधपुर का बेहतरीन नजारा आप देख सकते हैं. इस फोर्ट की दीवार 10 किलोमीटर तक फैली है

मेहरानगढ़ किले की दीवार ऊंचाई 20 फीट से 120 फीट तक है. वहीं, दीवार की चौड़ाई 12 फीट से 70 फीट तक है.

मेहरानगढ़ फोर्ट में 7 दरवाजे हैं, जिन्हें पोल कहा जाता है. इन में से एक पोल का निर्माण जयपुर के महाराजा मानसिंह ने सन् 1806 में जयपुर और बीकानेर के युद्ध में मिली जीत की खुशी में बनवाया था

मेहरानगढ़ म्यूजियम आज भी गवाह है, जिसमें रखे हैं राजा-महाराजाओं की पोशाकें और उनके हथियार. साथ ही, उनके रहन-सहन से जुड़ी चीजें आज भी यहां मौजूद हैं

जोधपुर का उम्मेद भवन पैलेस बेहद ही खूबसूरत और शानदार महल है. भारत में मध्यकाल में इसका निर्माण किया गया था

यह महल अपने इतिहास और बेहतरीन सरंचनाओं के लिए पूरे विश्वभर में विख्यात है.

मेहरानगढ़ किला और संग्रहालय देखने के लिए सर्दी सबसे अच्छा समय है। नवंबर से फरवरी तक मौसम सबसे सुहावना रहता है

जोधपुर का ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किला शहर के केंद्र से लगभग 10 किमी दूर है। पुराने शहर से किला केवल 2 किमी दूर है।

मेहरानगढ़ किले की यात्रा के लिए ऑटो-रिक्शा सबसे आम तरीका है। वे जोधपुर के चारों ओर, पुराने शहर के साथ-साथ आधुनिक भाग में भी उपलब्ध हैं